9:36 pm Wednesday , 4 November 2026
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सुख की चाह – Jaya Kishori

राधे – राधे ॥ आज का भगवद् चिन्तन

सुख की चाह

विषय सुखों की चाह ही मानव जीवन को सबसे अधिक दुःखी बनाती है। विषय सुख असंतोष को भी जन्म देते हैं और असंतोषी मन ही इस संसार का सबसे दुःखी मन है। जिस मन में संतोष नहीं वह बहुत कुछ प्राप्ति के बावजूद भी अतृप्त ही रहेगा। धन के बल पर भोग अवश्य प्राप्त हो जाते हैं, लेकिन तृप्ति की प्राप्ति नहीं हो सकती है। धन के बल पर पूरे संसार के भोगों को प्राप्त करने के बाद भी तुम अतृप्त ही रहोगे। रिक्तता, खिन्नता, विषाद, अशांति तुम्हारा पीछा नहीं छोड़ेगी।

असंतोष के कारण ही मानव पाप और निम्न आचरण करता है। एक मात्र संतोष ही मानव मन को प्रसन्न रख सकता है। प्रभु पर विश्वास हो तो अभाव में भी कृपा का और प्रत्येक क्षण आनन्द का अनुभव होगा। विषय के लिए नहीं वासुदेव के लिए जियो। विषय भोग से आज तक कोई तृप्त नहीं हो पाया। प्रभु चरणों के आश्रय से ही जीवन में तृप्ति का अनुभव किया जा सकता है

जय श्री राधे कृष्णा जी

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