सुनीता पाण्डेय 'सुरभि'🪈🦚🪷🪄🕉️ आए मिलने साजना, रही नींद में चूर। कोस रही हूँ नींद को, मुझसे हुआ कसूर।। अवसर निकला हाथ से,गई जरा मैं चूक। पछतावा होता मुझे, दिल में उठती हूक।। - सुनीता पाण्डेय 'सुरभि'ⓢ💞