सारिका सिंह (मनी )
किस्से जफ़ा के थे या वफ़ा के थे
हम इश्क ए रूह मे थे या किताबी थे
ना वो समझा सके मुझे न हम समझा सके उन्हें
हम भी तो दिल खोल कर बैठे थे
कोई झोका ही सही बस एक बार गुजर तो जाये
किसी ने रोका होगा पकड़ा होगा दामन जरूर उसका
ऐसा तो नहीं कि उसको मालूम नहीं
हम उसके इश्क के प्यासे थे
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