सारिका सिंह (मनी )
तेरी इंतजार मे थक जाती हूँ
लौट जाती हूँ वापस..
रात ढल जाएगी सबेरा तो होगा
महबूब मेरा आज तो आएगा..
यूँही दिन महीने बीत चले
मानता नहीं दिल कहती हूँ इसको आ अब लौट चले…
बरबस भर आती है आँखे…
जमीर जिन्दा है इश्क की इंतजार करती हूँ
यकी कर न कर हर रोज तुझे याद करती हूँ….. 🌹
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