neelam नजरों में बसने का हुनर तो सिखा दिया तुमने, अब जरा इन पलकों के झरोखे भी खोल दो। कैद हूँ कब से तुम्हारी ही तस्वीर में ऐ जान, मुस्कुरा कर अब अपनी मौजूदगी का राज़ खोल दो।