Ravina Mishra🧚‍♀️ मुरझाई, बलखाई, सिमटी पुराने ऊन के फंदों सी, आपकी यादें आज भी, मन की गहराईयों पर सिमटी हैं, मैं उन यादों को सुलझा रोज आपकी एक तस्वीर बुनती हूँ और सजा देती हूँ अपने दिल के आंगन में।