Renu Gulati रात भर बरसती है ख़्वाबों की नमी सी और दिन सारा हक़ीक़त से लबरेज़ हो रात की पेशानी पर पड़ी बूंदें ख्वाबो की उड़ा ले जाता है .... छोड़ जाता है निशां अपने बंद पलकों के पीछे फिर एक नमी लिए .......सैलाब सी....