सारिका सिंह (मनी )
मन करता है इन
दूरियों को एक पल में मिटा दूँ,
तुम्हें बाहों में भरकर ज़माने को
मैं भुला दूँ..!!
मगर मैं रुक जाती हूँ
ये इश्क़ बेबाक है,
इसमें कोई झिझक नहीं,
पर तुम्हारी रज़ा के बिना,
मुझे कोई हक़ नहीं…!!
मेरा हाथ बढ़ता है,
पर तुम्हारी इजाज़त का मोहताज है अभी… ❤️❤️
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