बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
वर्तमान समय आनलाइन व्यापार अपने उत्कर्ष पर है और बाजार में दुकानें खोलकर बैठने वाला व्यापारी हाथ पर हाथ धरे बैठकर ग्राहक की प्रतीक्षा करने को मजबूर हो रहा है और जो ग्राहक खुली दुकान पर आकर सामान मांगता है तो कीमत आनलाइन की दिखाते हुए उसी कीमत पर देने की बात कहता है जबकि सत्य तो यह है कि दुकानदार आनलाइन की कीमत पर सामान दे ही नहीं सकता क्योंकि आनलाइन कारोबार करने वाले बडे – बडे व्यवसायिक संस्थान के संचालकों और छोटे व्यापारियों के बीच सबसे बडा फर्क माल खरीदने का है और इसी के चलते बडी मात्रा में माल खरीदने वाले व्यवसायिक संस्थान छोटे दुकानदार के मुकाबले सस्ता माल खरीदने में सफलता पाते हहै।, दूसरा कारण छोटे व्यापारी को ग्राहक को सामान दिखाने में लगाना पडता है जबकि बडे व्यवसायिक संस्थान का इससे कोई सरोकार नहीं है। लोकल का फोकल कहने वाली सरकार को तबाह होते व्यापार के संचालक और स्वामियों की इस बात पर विचार करना चाहिए।
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