(लोग)
अगर गिरेबान में अपने झांक लेते,
मुझसे शिकवा कभी भी न करते।
कर्तव्य पथ से डिगा ना कभी भी,
ना कर्तव्य पथ से डिगूंगा कभी।
मुझे फ़र्ज़ का ज्ञान देने से पहले,
अपने भी भीतर जरा लोग झांके।
मैं भी उन्हीं पगडंडियों पर चला हूं,
जहां से शुरू हर किसी ने किया है।
न घर से लिया कुछ,न हड़पा किसी का,
अपने ही दम पर, सफर तय किया है।
कठिन था सफर, हौसला पर अडिग।
सत्य की राह हरदम चलता रहा हूं।
अगर गिरेबान में अपने झांक लेते,
तो मुझसे शिकवा कभी भी न करते।
प्रियंका विवेक सिंह
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