बदायू की बात – सुशील धींगडा के साथ
बदायूं शहर में नई सडकों का निर्माण, नाले निर्माण और बाईपास मार्ग के निर्माध हेतु 80 के दशक में बदायूं महायोजना बनाई गई जो आज तक फाईलों में दबी पडी है और उसके पीछे की जा कहानी ह ैवह भी बहुत अनूठी है। चर्चा है कि 80 के दशक में बनी बदायूं महायोजना को जिले में सत्ता परिवर्तन की ऐसी नजर लगी जिसके चलते बदायूं महायोजना ठंडे बस्ते से आगे बढकर फाईलों के समुद्र में खो गई। काश बदायूं के पालनहारों ने राजनेतिक मतभेद भूलकर जनता के दर्द को समझा होता तो आज शहर में सुबह से शाम तक दिखने वाला जाम का झाम नहीं दिखाई देता। स्कूली बच्चों से भरी स्कूल वाली बसों में बच्चों में जाम से मुक्ति मिल जाती और बदायूं होते हुए फर्रूखाबाद – मुरादाबाद राजमार्ग पर जाने वाले बडे वाहन परेशानी का शबब ना बनते और नो एंट्री लागू ही ना करना पडती क्योंकि बडे वाहन महायोजना में प्रस्तावित वाईपास से निकलते तो शहर में भहीद भगत सिंह चौक से दातागंज चुगी तक वाहनों की संख्या काफी कम होती।
bdnindia.com bdnindia.com | www.bdnindia.com
