Ravina Mishra
क़ीमत बड़ी चुकाई ज़रा से उधार की
नथनी के बदले नथ पे नज़र थी सुनार की
अब क्या मिसाल दें क़िस्मत के मार की
घर में कुँआरी रह गई बेटी कहार की
सीने को छोड़ो पीठ पे बांधा करो कवच
इस दौर में लड़ाई है पीछे से वार की
मुर्दे पे ख़ाक डाल के हाथों को झाड़ के
हंस के बातें होने लगी व्यापार की।
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