बदायूं एक्सप्रेस की बात – सुशील धींगडा के साथ
अपने जीवन के चालीस वर्ष पत्रकारिता में व्यतीत करने के बाद आज से दस वर्ष पूर्व जब बदायू एक्सप्रेस की रूपरेखा दिमाग में आई थी और वर्षो पूर्व बदायूं में अनंत चैतन्य उर्फ बंगाली बाबू द्वारा निकाले जाने वाले समाचार पत्र का नाम मुझे अच्छा लगा और उनका स्मरण करके बदायूं एक्सप्रेस को फरूखाबाद निवासी राजेश मिश्रा से होने वाली मंत्रणा से शुरू किया तो उस पहले दिन श्री मिश्रा और मैं दो लोग थे जबकि पहले सप्ताह में ही बदायूं एक्सप्रेस ने अपनी पहचान बना ली। बाद में डा राशिद, आईएम खान, गोविन्द देवल जैसे साथी मिलते गए जो आगे चलकर कारवां बनता गया। इस अवधि में मिलकर बिछुडने वालों से मुझे कोई शिकायत नहीं पर उनसे शिकायत है जिन्होने उपयोग किया पर मेरे नहीं हुए और आज भी गैरों की महफिल में मेरा होने का दावा कर रहे हैं लेकिन यह दुनिया एक सफर है जिसमें मिलना संयोग और बिछडना नियति है। बात सहयोगियों की जाए तो जीएस हीरो के अनमोल गुप्ता और अनुपम गुप्ता, मदर एथीना स्कूल के ब्रजेश सारस्वत, एपीएस उझानी के विमल कृष्ण अग्रवाल, बाबा ग्रुप के चेयरमैन अनुज वार्ष्णेय, ब्लूमिगडेल के ज्योति मेहदीरत्ता, तिथोनस के शरद बंसल, एचपीआईएस के शिवम पटेल, फयूचर बिल्सी के वीपी सिंह एवं एचवि उझानी के करन थरेजा ऐसे साथी और सहयोगी मिले जो कर कदम पर बदायूं एक्सप्रेस के साथ दिखाई दिए।
और अंत में सभी से यह अनुरोध करना है कि मैं भी एक इंसान हूं और हो सकता है कि मुझसे कुछ गलतियां हुई हो तो उसको लेकर आप सभी से यही कहूंगा कि मेरी गलतियों को अपने जीवन में मत आने दीजिएगा और जो बात हो बीती ताहि विसार दे अब आगे की सोच पर चलते हुए फिर से वही राह और वही चाह बनाने की राह पर चलियेगा। ,
बदायूं एक्सप्रेस टीम को छोडकर जा चुके और साथ निभाने वाले सभी साथियों को दस वर्ष के सफर की शुभकामनाएं और बधाई।




















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