गुरु अमरदास जी (Guru Amardas Ji) सिक्खों के तीसरे गुरु थे, जो 73 वर्ष की उम्र में गुरु नियुक्त हुए। वे 26 मार्च, 1552 से 1 सितम्बर, 1574 तक गुरु के पद पर आसीन रहे। गुरु अमरदास पंजाब को 22 सिक्ख प्रांतों में बांटने की अपनी योजना तथा धर्म प्रचारकों को बाहर भेजने के लिए प्रसिद्ध हुए। वह अपनी बुद्धिमत्ता तथा धर्मपरायणता के लिए बहुत सम्मानित थे। कहा जाता था कि मुग़ल शंहशाह अकबर उनसे सलाह लेते थे और उनके जाति-निरपेक्ष लंगर में अकबर ने भोजन ग्रहण किया था। गुरु अमरदास के मार्गदर्शन में गोइंदवाल शहर सिक्ख अध्ययन का केंद्र बना।
*गूगल से साभार*
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