4:14 am Wednesday , 30 September 2026
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सद्गुणों को धारण करना है सत्संग है : आचार्य संजीव रूप

वेद तथा का तीसरा दिन

बिल्सी,तहसील क्षेत्र के एक तीर्थ गुधनी में स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में चल रही वेद कथा के तीसरे दिन वेद कथाकार आचार्य संजीव रूप ने सत्संग का वास्तविक अर्थ लोगों को समझाया । उन्होंने कहा सत्य का संग सत्संग है । सद्गुणों का संग ही सत्संग है ! जिन गुणों व सद्गुणों को धारण करके व्यक्ति महान बनता है वही गुण मनुष्य को प्रयत्न करके धारण करना चाहिए यही सत्संग है ! परमेश्वर के बताए रास्ते पर चलना भजन है । केवल गीत गाना श्लोक या मंत्र पाठ करना धर्म के चिन्हों को धारण करना सत्संग नहीं है किंतु दान, परोपकार, सेवा, दया और पुरुषार्थ ही सच्चा सत्संग है ! प्रश्रय आर्य ,ईशा आर्य, तृप्ति आर्य, मोना रानी कौशिकी रानी ने भजन प्रस्तुत किए । किशन पाल आर्य ,बद्री प्रसाद आर्य राकेश आर्य , अवनीश पाल , राजू पाल, विश्वजीत पाल,श्रीमती सुराजवती देवी,श्रीमती संतोष कुमारी,श्रीमती स्वाति रानी, नेम पाल आर्य आदि मौजूद रहे

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