Sugandha Sharma *कुछ पल जो साथ मेरे तुम होते हो,* *वो पल नहीं जिंदगी होती है मेरी* *जिस नजर से मुझे तुम देखते हो,* *उस नजर में ही कायनात होती है मेरी।* *जो कुछ मुझे तुम कहते हो* *वो लफ्ज़ नहीं नज़्म होती हैं मेरी।*