बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
जिले के राजनेतिक दलों में गुटबाजी का जो दौर देखने को मिल रहा है उसको लेकर राजनेतिक दलों को समर्पित लोगों का दिल रोता नजर आ रहा है। कुछ दिन पहले कांग्रेस की हालत सामने आई तो पता चला कि कांग्रेस में कार्यकर्ताओं से ज्यादा गुट तैयार हो गए हैं औरन हालत इतने खराब हैं कि आपस में बोलचाल तक बंद होने की खबर आम आदमी के बीच सुनाई दी जबकि कुछ दिन पूर्व समाजवादी पार्टी का आंतरिक संघर्ष उस समय देखने को मिला जब सपा के एक गुट ने बदायूं में आयोजित मान स्वाभिमान दिवस में आने वाले प्रदेश अध्यक्ष के कार्यक्रम का ही वाहिस्कार कर दिया और केद्र और प्रदेश की सत्ता पाने के बाद भाजपा की गुटबाजी सर्वविदित है। नगर निकाय चुनाव चुनाव में उसहैत, उसावा, अलापुर, इस्लामनगर, वजीरगंज नगर पंचायत तथा सहसवान, बिसौली और बदायूं नगर पालिका में भाजपा की पराजय के पीछे की गुटबाजी किसी से छिपी नहीं है और अब तो आंवला के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने लोकसभा चुनाव में पराजय के पीछे अपनों को जिम्मेदार सा ठहरा दिया है।
अब एक बात आम आदमी समझ में नहीं आ रही कि आखिर इन दलों की अनुशासन समिति कहां सोई हुई है और अगर इतना सब होने के बावजूद इन दलों की अनुशासन समिति को सब कुछ अच्छा दिख रहा है तो कोई और क्या और क्यों तथा कब तक कहेगा।
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