बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
बात ज्यादा पुरानी नहीं है और ऐसा लगता है कल की बात है। जिले की एक राजनेतिक पार्टी के दो दिग्गजों के अपना – अपना जलवा दिखाने की बात आम आदमी के सामने आई थी जिसमें एक ‘- दूसरे पर हलवा खाने के आरोप लग रहे थे लेकिन आगे की में ठेंगा दिखाने की बात इशारों में कही जा रही थी। दोनों के जलवा दिखाने की जंग में क्या से क्या तक सब कुछ हुआ था और एक चुनाव में एक पक्ष की दावेदारी को दरकिनार कर दिया था जबकि दूसरे चुनाव पार्टी द्वारा चुनाव चिंह ना दिए जाने का दाव खलने के बाद ऐसी गुटबाजी आम आदमी के सामने आई जिसमें एक पार्टी के एक नहीं दो उम्मीदवार आमने – सामने मैदान में उतरे और मजेदार बात यह थी कि दोनों पक्ष अपनी बात और सब हैं साथ का दावा कर रहे थे। दो चुनाव के बाद जब तीसरा चुनाव आया तो एक दिग्गज को जिले से दूर कर दिया गया था। इस जंग में संगठन भले इंकार करें पर सच यही था कि दोनों दिग्गजों के पीछे अपनी पार्टी के ऐसे समर्थक खुलेआम मैदान में अपना रंग दिखाते नजर आ रहे थे लेकिन बीते दिवस वही हुआ जो राजनीति में सदैव से होता आया है और वह चौकाने वाली बात थी क्योंकि एक दिग्गज के सार्वजनिक कार्यक्रम में उनकी अपनी पार्टी के विरोधी दिग्गज सहभागिता कर रहे थे और उनकी खातिर दूसरे का विरोध करने अपने घर बैठकर तमाशा देखने को मजबूर हो रहे थे उस दौरान किसी ने आपसी मिलने पर अपनी हालत अपने दूसरे साथी से कुछ इस प्रकार कही। हुए थे तुम पर आशिक हम, भला मानो, बुरा मानो और यह चाहत अब भी ना होगी कम बुरा मानो – भला मानो।
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