(मेरे राम)
मेरे अंतर मन में ,इस जग के कण-कण में,
तुम ही जन्मो जन्म से हो राम।
तेरी ही धुन हो तेरी ही लय में,
बीते मेरे जीवन की सुबह शाम।
फूलों में कलियों में , बागों और गलियों में,
चिड़ियों की धुन में भी गूंजे सदा तेरा गान।
तेरे चरण की रज से पत्थर भी इंसान बने,
कुछ ऐसा ही कर दो प्रभु जपता रहूं तेरा नाम।
जग के अंधेरों से मैं ना डरूं, आगे हमेशा बढ़ू,
नेकी के रास्ते पे चल के प्रभु करता रहूं सारे काम।
मेरे अंतर मन में, इस जग के कण-कण में,
तुम ही जन्मो जन्म से हो राम।
प्रियंका विवेक सिंह
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