बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
बदायूं जिले का निवासी होकर राज्यसभा का सांसद बनने के बाद केंद्र सरकार में मंत्री हो और केन्द्रीय ग्रह मंत्री के करीबी के रूप में जिसकी पहचान बनी हुई हो। बदायूं के रहने वाले प्रदेश के सूचना आयुक्त हों। जिले की तीन विधानसभा सीटों पर भाजपा के विधायक हों। एक राज्यसभा सदस्य बदायूं का हो, जिला पंचायत पर भाजपा का कब्जा हो और इतना सब होने के बावजूद बदायूं से प्रदेश की राजधानी लखनउ और देश की राजधानी दिल्ली रेल मार्ग से ना जुडी हो तो बदायूं की खिल्ली उडना स्वभाविक प्रक्रिया है और लोकसभा चुनाव में जनपद में दोनों सीटों बदायूं और आंवला पर भाजपा को पराजय देखने के बाद भाजपा के पालनहारों की कार्यप्रणाली पर उंगली उठती है तो इसे कौन गलत कह पाएगा।
हमारे पालनहारों की हालत यह है कि सब कुछ सरकार का होते हुए बदायूं की बगिया में बहार नहीं है और बदायूं की आर्थिक रीढ कहे जाने वाले उपनगर उझानी में ट्रेन का स्टापेज कराने में भाजपा की पूरी कायनात फेल हो गई है। देश में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा हो और बिल्सी विधानसभा क्षेत्र के कछला में गंगा होने के बावजूद सिचाई के साधन को किसान तरस रहा हो। पूरे देश में इत्र की महक देने वाले सहसवान क्षेत्र में केवडा की खेती बर्बादी के कगार पर पहुंच गई हो और आजादी के 75 वर्ष में सहसवान क्षेत्र में रेल की पटरी ना आ पाई हो। बिसौली, वजीरगंज के साथ जिला मुख्यालय को तरस रहा हो और लोगों को गंगा एक्सप्रेस का सपना दिखाकर टहलाया जा रहा हो तो बदायूं वालों और बदायूं के पालनहारों की खिल्ली उडाने का मौका कोई क्यों छोडेगा।
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