11:25 am Thursday , 13 August 2026
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दुनिया वालों दुनिया में अब तो सारा किस्सा फोटो का ?

बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
एक समय वह था जब हमारे पालनहार अपने काम अपना दायित्व समझकर किया करते थे लेकिन आज हालात यह नजर आ रहे हैं कि सारे काम फोटो खिचाने के लिए किए जा रहे हैं। पूर्व के समय से जिस तरह वैवाहिक और समाजिक समारोह में गतिविधियों के फोटो शैसन हुआ करते थे वह राजनेतिक क्षेत्र में बुरी तरह हावी नजर आने लगे हैं जिसे देखकर कभी – कभी तो ऐसा लगता है कि काम कम और चर्चा ज्यादा की राह पर राजनेतिक मैदान में फोटो शैसन प्रतियोगिता चल रही है। वर्तमान में पत्रकारिता का भी लगभग यही हाल दिख रहा है पहले घटना के समय लोग सहायता किया करते थे अब घटना होने पर सहायता करने वाले कम रील और फोटो बनाने वाले ज्यादा दिखाई देते है और सेवा करने वाले काम पर कम और कैमरे के सामने ज्यादा रहने पर ध्यान देते नजर आते है। इसके अलावा पूर्व में नेता जी के जयकारे लगाने वाले ज्यादा मिला करते हैं लेकिन अब जयकारे लगाने वाले कम और फोटो और वीडियो बनाने वालों की लाइन नेता जी के आगे पीछे नजर आ रही होती है। फोटो के प्रति अगाध श्रद्धा रखने वालों की संख्या दिन दूनी रात चौगनी बढती नजर आ रही है और यह फोटोग्राफी अक्सर हमारे घर में उस समय इतनी तल्लीनता से होती दिखती है कि जब कोई मेहमान घर में आया हो और मेहमान की आवभगत से ज्यादा उसके फोटो शेसन को वरीयता दी जाती है।

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