बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
जून माह में जनपद सहसवान क्षेत्र के जरीफनगर के गांवों में आग ने तांडव मचाया, उसी रात उझानी की मेंथा फैक्ट्री भी जबरदस्त आग लगने से मुजरिया क्षेत्र के गांव बिचौला निवासी एक व्यक्ति की जलकर मौत हो गई जबकि बदायूं के रामलीला मैदान में चल रही प्रदर्शनी में बीते सप्ताह आग लगी जिसमें दुकानदारों का लाखों रूपये का सामान लन कर राख हो गया। आग लगने की उपरोक्त तीन घटनाओं में करोडों का नुकसान हुआ जबकि बिचौला निवासी एक व्यक्ति की मौत होने की घटना सामने आई परंतु शासन की ओर से सिर्फ जरीफनगर की घटना के अग्नि पीड़ित परिवारों को सहायता राशि दी गई बाकी दोनों घटनाओं को लेकर अब तक कोई सहायता दिए जाने की बात सामने नहीं आई है और स्थानीय सत्ताधारी तथा विपक्ष दोनों ने आंख और कान बंद कर रखे हैं।
तीनों घटनाओं में एक बात समान रही कि तीनों स्थानों पर आग लगने की सूचना मिलने के बाद जिले के प्रशासनिक अधिकारियो के अलावा सत्ताधारी दल के तमाम नेताओं ने घटना स्थल का दौरा किया परंतु उसके बाद उझानी की फैक्ट्री में मरने वाले और गांधी मैदान में दुकाने जलने से पूरी तरह बर्बाद होने वाले दुकानदारों की ओर किसी ने मुडकर नहीं देखा, बस उझानी की मेंथा फैक्ट्री में मरने वाले ग्राम बिचौला निवासी मृतक के परिवार को पूर्व एमएलसी जितेंद्र यादव द्वारा आर्थिक सहायता अपने स्तर से दी गई।
रामलीला ग्राउंड में नेता सत्ता हो या विपक्षी सभी ने कोरा ढांढस बंधाया मदद किसी ने नहीं की। वही बात आज आम आदमी के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है जिसमें सत्ताधारी दल के स्थानीय नेताओं द्वारा सबका साथ की बात को शासन स्तर तक ना पहुंचाने और केवल फोटों खिचवाने वाले काम करने का आरोप लग रहा है।
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