10:02 am Thursday , 8 October 2026
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जाति और धर्म के नाम पर बँटता भारत: विकास की राह में सबसे बड़ा रोड़ा

समाज दर्पण :प्रदीप प्रजापति

आज का भारत तकनीक और वैश्विक पहचान की ओर बढ़ रहा है, लेकिन जातिवाद और धर्म के नाम पर फैलती विघटनकारी सोच समाज को भीतर से खोखला कर रही है। “वसुधैव कुटुंबकम्” का संदेश देने वाला देश, अब जाति और धर्म के नाम पर बंट रहा है। गाँव-शहर, शिक्षा-नौकरी, शादी-मौत—हर जगह जाति का ज़हर गहराई तक फैला है। धर्म भी आत्मिक शांति का नहीं, बल्कि राजनीति का हथियार बन गया है। सोशल मीडिया पर नफरत, मंदिर-मस्जिद विवाद और धर्मांतरण को लेकर भय फैलाया जा रहा है।

चौंकाने वाली बात ये है कि ये सोच सिर्फ अशिक्षित नहीं, पढ़े-लिखे तबकों में भी मौजूद है। राजनीति में यह प्रवृत्ति और घातक हो चुकी है जहाँ वोटों के लिए समाज को जाति-धर्म में बाँटा जाता है। ऐसे में युवाओं को आगे आकर सोच बदलनी होगी। किसी की जाति या धर्म नहीं, उसका कर्म और सोच ही उसका असली परिचय होना चाहिए।

समाज की एकता के लिए ज़रूरी है कि धर्म को पूजा तक और जाति को नाम तक सीमित रखा जाए। हमें तय करना होगा—हमें बँटना है या जुड़ना।

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