1:35 am Thursday , 5 November 2026
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ख्वाब सिर्फ ख्वाबों में ही अच्छे लगते हैं – वर्षा वार्ष्णेय

——-ख्वाब सिर्फ ख्वाबों में ही अच्छे लगते हैं
हकीकत की दुनिया कड़वे सत्य के सिवा कुछ नहीं ——

💕 प्यार पाने के लिए आज दुनिया किस हद तक गिरती जा रही है ,सोशल मीडिया के जरिये हम सभी रात दिन देख रहे हैं । पति पत्नी को मार रहा है ,बच्चों पर कोई तरस नहीं ।पत्नी पति को मार रही हैं और सोच रही हैं कि अब हम प्यार की दुनिया बसायेंगे । अरे जो प्रेम को पाने के लिए किसी का कत्ल कर सकता है क्या वो प्रेम करने लायक हैसियत रखता है ? ★प्रेम षड्यंत्र नहीं रिश्ते निभाने का नाम है ।★ प्रेम एक दूसरे की भावनाओं में बहने का नाम है ।★क्या किसी को मारने के बाद आप ख़ुश रह पाओगे ? खुशियों का पर्याय आज न जाने क्यों बदल चुका है । एक दूसरे कर लिए त्याग ,परिवार में सामंजस्य ,भाई-भाई का प्रेम ,बड़ों का सम्मान करना ,माता -पिता की बातों पर ध्यान देना जैसे अतीत की बातें लगती हैं । आज चारो ओर प्यार के नाम पर जो अश्लीलता और भद्दापन नजर आता है क्या वो सच में प्रेम है या मन का छलावा ? अरे सच की दुनिया में रहना सीखो, यदि सच में प्रेम को समझने की हिम्मत है तो जीवन की कठिनाइयों में भी अपनी हिम्मत का परिचय देकर समाज और परिवार में प्रेम का मंत्र फूंको वरना आज जिस तरह का माहौल दिखाई दे रहा है दुनिया नफरत के चरम पर पहुंच रही है । सबको सिर्फ अपनी खुशी अपने दुःख से मतलब है । पैसा ही इज्जत का पर्याय और सामाजिक दिखावों का एकमात्र उद्देश्य बन कर रह गया है । कहाँ है प्रेम इस दुनिया में ?

———मिट रहा है प्रेम का नामोनिशान
पनप रही है नफरत की मंडी
आदर्शों की नगरी में चल रही
कत्ल और साजिशों की चक्की ————

वर्षा वार्ष्णेय अलीगढ़
Versha Varshney

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