बदायूं की बात- सुशील धींगडा के साथ
व्यापार करना और धन अर्जित करना कोई बुरा काम नहीं अगर अर्जित धन का प्रयोग समाज के हित में किया जाए। आज उन्हीं लोगों की बात करते हैं जिन्होंने व्यापार में धन कमाया और समाज से शिक्षा का अंधकार दूर करने का वह काम किया जिसके चलते वर्तमान में बदायूं की तमाम प्रतिभाएं प्रदेश और देश में अपना और परिवार के नाम साथ शिक्षण संस्थान के साथ जिले का नाम रोशन कर रही हैं। बदायूं में शिक्षा का स्तर कितना पिछडा हुआ था और आज जनपद की शिक्षा का स्तर कहां पर है इस पर कुछ कहना सूर्य को दीपक दिखाने की कहावत को चरितार्थ करेगा।
बदायूं में प्रथम अंग्रेजी माध्यम और सीबीएसई से सम्बृद्ध स्कूल अलीगढ निवासी ब्रजेश सारस्वत ने किया जिसके उपरांत महार्षि विद्या मंदिर सामने आया तदोपरांत और महेंद्र स्वरूप गुप्ता द्वारा फलोरंस नाइटिंगल स्कूल की स्थापना की गई पर बदायूं में बदायूं के किसी व्यवसाई के उच्चस्तरीय शिक्षण की स्थापना ज्योंति मेंहदीरत्ता ने ब्लूमिंगडेल स्कूल की स्थापना से किया और उसके बाद बदायूं में व्यवसायिक गतिविधियों से धन अर्जित करके बदायूं में एक से एक तमाम शिक्षण संस्थानों की स्थापना हुई जिसमें सबसे उपर जो नाम आता है जो हर प्रसाद सिंह पटेल का है जिन्होने दातागंज मार्ग पर एचपीआइएस इंटरनेशनल स्कूल और एचपी इंस्टीटयूट आफ हायर एजूकेशन तथा एचपी इंस्टीटयूट आफ फार्मेसी की स्थापना की। वर्तमान में टिथोनस इंटरनेशनल स्कूल, बीआरबी माडल स्कूल, बीआईएमटी, ऐस इस्टीटयूट सहित तमाम ऐसे शिक्षण संस्थान सामने आए हैं जिनकी स्थापना व्यवसायिक गतिविधियों से धन अर्जित करके शिक्षण की स्थापना व्यवसायिक परिवारों द्वारा की गई है।
जनपद के उपनगरों बिसौली, बिल्सी, सहसवान और दातागंज, मुजरिया, अलापुर, ककराला, कछला, वजीरगंज, में व्यवसायिक परिवारों द्वारा स्थापित शिक्षण संस्थानों तथा जिले की उन शिक्षण संस्थानों के बारे में फिर कभी अपनी बात कहने का प्रयास करूंगा जबकि इसके साथ जिले के बाहरी जनपद से बाहर से आकर माफियाओं के शिक्षण संस्थानों की स्थापना करने वालों का कच्चा चिठठा आपके सामने लाने की कोशिश करूंगा।
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