कुम्भ स्नान की बात – सुशील धींगडा के साथ
कल 19 फरवरी 2025 के दिन महाकुम्भ में स्नान करने पहुंचने ा वह अवसर मिला जो वर्तमान में भारतीय संस्कृति और मानव जीवन की एक बडी आवश्यकता है। महाकुम्भ में की जाने वाली व्यवस्थाओं की जितनी तारीफ की जाए वह कम लगती है लेकिन व्यवस्थाओं को फेल करने हमारे कुछ अािधकारियों के वह कारनामे हैं जो महाकुम्भ में अव्यवस्था फैलाने के साथ आम आदमी को परेशानी का कारण बन रहे हैं और वह है कि अधिकारियों के कारों के काफिले में शामिल कारों में सवार अधिकारयों के परिजनों की कारों सवार लोगों से आम आदमी के हिस्से में आती दिख रही है। महाकुम्भ में आने वाले वीआईपी तो स्नान और पूजा पाठ करके महाकुम्भ से वापस चले गए लेकिन मेले में रहने वाले अधिकारियों के परिजन दिन में कई – कई बार कारों का काफिला लेकर घूमते नजर आते हैं और मेले की सुरक्षा में तैनात वर्दीधारी इन काफिलों कोे रोकने के लिए दिन मे ंना जाने कितनी बाद मेले में आम आदमी को जाने वाले रास्ते पर चलने वाले आम आदमी की भीड को रोकने में सारी ताकत लगा देते हैं जो कुछ ही देर में जाम की समस्या का कारण बन जाती है और जब तक पुलिस जाम की उस समस्या का निस्तारण कर पाती है तब तक अािधकरयों के परिजनों की कारों का काफिला फिर से पुलिस को यातायात अवरोध करने की राह पर चलते हुए आम आदमी का आवागमन रोकने की स्थति बनाने को मजबूर कर देता है और यह स्थति दिन में कई बार मेला आने वाले रास्तो पर दिखाई देती है जो मेले में रहने वाले अधिकारियों के परिजनों की कारों के काफिले से दिन में कई बाद देखने को मिल रहीं है।
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