4:06 pm Wednesday , 4 November 2026
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हे नीलकंठ- प्रिया यादव

प्रिया यादव

हे नीलकंठ, पीड़ा हर लो,
श्वासों में फिर जीवन भर दो।
थका हुआ ये तन, टूटा मन,
तुम छू लो तो फिर से संवर दो।
गले में जैसे विष तुमने धारा,
वैसे ही मेरा दुख भी सह लो,
जो दर्द छुपा है रग-रग में,
महाकाल, उसे तुम हर लो।
जब रातें लंबी, नींद पराई,
और धड़कन भी डरने लगे,
#प्रिया_यादव

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