बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
बदायूं की एक घटना को लेकर चर्चाओं का कंद्र विन्दु बने बिल्सी के भाजपा विधायक ने राजनेतिक पारी युवा मोर्चा से की और उनके समय में युवा मोर्चा ने अपनी अलग पहचान बनाई, प्रदेश स्तर उनकी भूमिका पर निगाह और प्रभाव उस समय आम आदमी को देखने को मिला जब तमाम धुरन्धरों को नजरंदाज करके हरीश शाक्य को बदायूं का जिलाध्यक्ष बनाया गया। हरीश शाक्य ने जिलाध्यक्ष बनने के बाद जिले में विधानसभा चुनावों में भाजपा का परचम फहराने में क्या रंग दिखाया था उससे भाजपा संगठन की आंखें खुली की खुली रह गई थी इसके एक समय वह भी आया जब हरीश शाक्य को बदायूं संसदीय सीट से भाजपा उम्मीदवार बनाने की तैयारियों के पूरा होने के बाद अंतिम समय बदायूं से डा संघमित्रा को भाजपा उम्मीदवार बनाया गया लेकिन श्री शाक्य ने पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी से डा संुघमित्रा को सांसद बनाने में दिन रात एक कर दिया जिसका प्रतिफल भाजपा हाईकमान ने विधानसभा चुनाव में बिल्सी से भाजपा उम्मीदवार बनाया तो सजातिय तीन विरोधी उम्मीदवारों की राजनेतिक जंग को मात देकर श्री शाक्य बिल्सी के विधायक बन गए और आजादी से अब तक की बिल्सी की सबसे बडी समस्या बस अडडे का निर्माण कराने में जुट गए, जनता के बीच चल रही चर्चाओं पर विचार करे तो ऐसा लगता है कि इसी बीच विधायक श्री शाक्य के दो अग्रजों ने योजनावृद्ध तरीके से ऐसा चक्रव्यूह तैयार कर दिया जिसमें श्री शाक्य अभिमंयू की तरह फंस कर परेशानी का सामना करें और उनकी छवि धूमिल हो सके। ।
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