2:18 pm Wednesday , 4 November 2026
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विधानसभा चुनाव में कौन कहां से तैयारी में अपनी त्योरी चढा रहा है ?

कौन कहां से तैयारी में अपनी त्यारी चढा रहा है ?
बदायूं की बात- सुशील धींगडा के साथ
हालांकि विधानसभा चुनाव में अभी समय है लेकिन जिले में अपनी राजनेतिक विरासत को संभालने और अपने परिवार को मैदान में लाने की तैयारियों में जुटे दावेदारों की लगभग हर जगह लम्बी लाइन अभी से दिखने लगी है और इसको लेकर सम्बन्ध बनाने और अपनापन दिखाने का टिकट के दावेदार कोई कसर नहीं छोड रहे हैं। बात बिसौली सुरक्षित क्षेत्र से शुरू करें तो इस क्षेत्र में सबसे अजीब हालत दिख रहे हैं क्योंकि एक म्यान में दो तलवारे दिख रही हैं और ऐसा लगता है कि समय आने पर एक तलवार बाहर निकल कर अपना रंग जरूर दिखाएगी। सहसवान क्षेत्र में विधायक ब्रजेश यादव को टिकट मिलने में कोई संशय नहीं दिख रहा लेकिन उनकी जंग किससे होगी और होगी अथवा उनके विरोधी राजनेतिक वाकओवर के हालात दिखाएगें इसका जवाब समय आने पर दिखेगा। बिल्सी सीट पर भाजपा के विधायक हरीश शाक्य से मतदाताओं से ज्यादा अपने करीबी परेशानी में डाल सकता है क्योंकि उनके एक प्रमुख करीबी पुत्र प्रेम की राह पर दिख रहे हैं और उस हालात में श्री शाक्य को क्षेत्र परिवर्तन का सामना करना पड सकता है। सदर बदायूं सीट पर विधायक महेश गुप्ता को पुनः टिकट मिलने में कोई खास परेशानी नजर नहीं आ रही और उनका मुकाबला सपा उम्मीदवार से फिर देखने को मिल सकता है पर सपा का उम्मीदवार कौन होगा, वक्त बताएगा फिलहाल पूर्व मंत्री आबिद रजा सपा के टिकट के प्रमुख दावेदार दिख रहे हैं पर उनके टिकट में सपा नहीं उनसे खफा चेहरे का एक इशारा फिर से कोई नया खेल करा सकता है इससे भी इंकार नहीं किया जा सकता। शेखूपुर सीट पर सपा विधायक हिमांशु यादव का एक बार फिर भाजपा के पूर्व विधायक धर्मेंद्र शाक्य से उस हालात में हो सकता है जब बिल्सी से शेखूपुर की रेल ना चले लेकिन रेल चल गई तो खेल बहुत रोचक और चर्चा का केंद्रविन्दु होने वाला बनेगा। दातागंज में भाजपा विधायक राजीव कुमार सिंह बब्बू के टिकट को कोई खतरा नहीं है और सपा में चल रही गुटबाजी का सीधा लाभ भाजपा को मिलने से इंकार नहीं किया जा सकता। विदित रहे कि इस क्षेत्र में सपा की ओर से पूर्व विधायक प्रेम पाल सिह यादव अपने पुत्र और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती चेतना सिंह यादव अपने पुत्र को टिकट की दावेदारी के साथ चुनाव की तैयारी में जुटे दिख रहे हैं लेकिन यह सच नजर आता है कि उन दोनों का विरोध बदायूं में पहले खुलकर हुआ है और जिले में सपा की बदहाली तथा लोकसभा चुनाव में आंवला और बदायूं सीट पर सपा को मिलने वाली जीत से मिलने वाली खुशहाली के बावजूद हालातों में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है।

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