2:12 pm Wednesday , 4 November 2026
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बदायूं में “विकास” का पहला दिन: सरकारी तंत्र मस्त, जनता त्रस्त

बदायूं में “विकास” का पहला दिन: सरकारी तंत्र मस्त, जनता त्रस्त!

ओवरब्रिज बंद होते ही शहर जाम, अफसरों की प्लानिंग धरी रह गई।

बदायूं एक्सप्रेस विशेष संवाददाता

नारा था “सुविधा का विस्तार”, हकीकत बनी “जाम का अत्याचार”। ओवरब्रिज के जीर्णोद्धार के नाम पर एक महीने के लिए पुल बंद किया गया, और पहले ही दिन बदायूं की सड़कों ने दम तोड़ दिया।

अंडरपास बना अंडरवर्ल्ड

सुबह 9 बजते-बजते अंडरपास ने जाम का रूप धारण कर लिया। स्कूल बसें, एंबुलेंस, दफ्तर जाने वाले बाबू और सब्जी के ठेले सब एक ही कतार में। चिलचिलाती धूप में लोग पसीना पोंछते रहे, गाड़ियों के इंजन गर्म होते रहे, पर ट्रैफिक हिला तक नहीं।

प्रशासन नदारद, जनता बेबस

मौके पर न ट्रैफिक पुलिस का सिपाही दिखा, न डायवर्जन का बोर्ड। रूट प्लान कागजों में था, जमीन पर सिर्फ हॉर्न और गालियों की गूंज। एक मरीज को अस्पताल ले जा रहा परिवार 45 मिनट तक अंडरपास में फंसा रहा। पूछने पर जवाब मिला: “साहब मीटिंग में हैं।”

लापरवाही की लैबोरेटरी

स्थानीय दुकानदार रमेश गुप्ता भड़कते हुए बोले, “पुल बंद करने से पहले 4 पुलिसवाले तो खड़े कर देते। एक महीना ऐसे ही झेलना है क्या?” कॉलेज छात्रा प्रिया ने कहा, “पेपर छूट गया। विकास चाहिए, पर ऐसी सजा देकर क्यों?”

सवाल जो आग की तरह फैल रहे हैं
1. प्लानिंग कहाँ गई: जब पता था एक महीना पुल बंद रहेगा, तो ट्रैफिक डायवर्जन का ट्रायल पहले क्यों नहीं किया?
2. जिम्मेदार कौन: PWD, ट्रैफिक पुलिस, या नगर पालिका? एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ने का मैच शुरू।
3. विकल्प क्या: अंडरपास के अलावा शहर में कोई दूसरा रास्ता पास कराया गया या नहीं?

जनता की हुंकार

“जीर्णोद्धार जरूरी है, पर जीना भी जरूरी है। पहले जाम का इलाज करो, फिर पुल का।”

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