3:59 pm Wednesday , 4 November 2026
BREAKING NEWS

चिन्तन- Jaya Kishori

Jaya Kishori__

चिन्तन

स्वाति की बूँदें

जीवन्मुक्ति के बाद भी एक सूक्ष्म अहम् रहता है, पर इस बात का सबको पता नहीं है | यह सूक्ष्म अहम् बन्धन कारक तो नहीं होता, पर मतभेद करने वाला तो होता है

परमप्रेम की प्राप्ति होने पर यह सूक्ष्म अहम् सर्वथा मिट जाता है | असली पूर्णता प्रेम की प्राप्ति में ही होती है

सब ज्ञानी प्रेमी हों- यह नियम नहीं है, पर सब प्रेमी ज्ञानी होंगे- यह नियम है

ज्ञान केवल जीव को ही होता है, ब्रह्म को नहीं, क्योंकि ब्रह्म तो ज्ञानस्वरूप ही है | परन्तु प्रेम भक्त तथा भगवान्– दोनों में होता है | प्रेम दोनों तरफ से होता है

माधुर्य’ के अन्तर्गत सभी रस आ जाते हैं | दास्य, सख्य और वात्सल्य– तीनों रस ‘माधुर्य’ में रहते हैं इसलिये ‘माधुर्य’ को रसराज कहते हैं

प्रेम होता है– भगवान् को अपना मानकर याद करने से

नारायण! नारायण!! नारायण

विज्ञापन एक्सप्रेस
No posts found.