बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
बदायूं की राजनीति में गुटबाजी हमेशा रही है इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता और यह बात जगजाहिर भी है और सत्ताधारी और गुटबाजी आजादी के बाद से हमेशा दिखाई दी है। और यह बात भी सच है कि सत्ता के दौरान गुटबाजी की कढाई में पकोडे बनाने वालों के किसी भी दल के समय में किसी के हाथ कुछ नहीं लग पाया है। कांग्रेस में स्व श्रीकृष्ण गोयल, स्व असरार अहमद हो, स्व भोला शंकर मौर्य, सलीम इकबाल शेरवानी के समय की गुटबाजी का जो परिणाम हुआ वहीं परिणाम जनता पार्टी के शासन में बदस्तूर दिखाई देता रहा, सपा में स्व बनवारी सिंह यादव ऐसे राजनेतिक दिखे जिन्होने अपने समय किसी विरोधी को पनपने नही दिया। बसपा की गुटबाजी जगजाहिर है और वर्तमान में कांग्रेस के चूल्हे पर गुटबाजी की दलदल कौन सी खिचडी पका रही है इसका ज्ञान तो कांग्रेस तक को नहीं हो पा रहा जबकि सपा की देग में गुटबाज कौन सा सालन पका रहे हैं इसका ज्ञान सैफई को नहीं हो पा रहा। अब भाजपा की बात करें तो एक बात सच नजर आएगी कि बदायूं में सब कुछ प्रधानमंत्री श्री मोदी और मुख्यमंत्री श्री योगी की नाव का है जो भाजपा चुनाव की वैतरणी पार कर लेती है बदायूं में अधिकांश के दोनों हाथ पूरी तरह खाली नजर आएं हैं। ं
भाजपा ऐसा राजनेतिक दल है जिसमें समर्पित कार्यकर्ताओं का संगम दिखाई देता है लेकिन नगर निकाय चुनाव में जो हालत गुटबाजी ने दिखाई उससे भाजपा के पालनहारों ने कोई सीख ली हो अथवा कोई कार्रवाई की हो ऐसा एक भी मामला अब तक सामने नहीं आया है और ऐसा लगता है कि भाजपा में अधिकांशतयः जो तुम कर लो वह तेरा है, जो मैं कर लू वो मेरा है और पूरी नाव ना तुम कहो मेरी ना मैं देखू तेरी की हालत में मेरी आपकी कृपा से सब काम हो रहा है की कहावत चरितार्थ करने पर चली जा रही है बस सच यह भी है कि मंजिल भी मिलती जा रही है।
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