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उझानी: तंग गलियों में मौत बांट रहे कोचिंग सेंटर, आग से बचाव का नामोनिशान नहीं

उझानी: तंग गलियों में मौत बांट रहे कोचिंग सेंटर, आग से बचाव का नामोनिशान नहीं।

उझानी-बदांयू 24 जून।

उझानी की गली-गली में बिना मानक चल रहे कोचिंग, जिम और लाइब्रेरी सेंटर छात्रों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। बहुमंजिला इमारतों में एक ही एंट्री-एग्जिट, संकरी सीढ़ियां और फायर एनओसी का कोई अता-पता नहीं। लखनऊ हादसे के बाद भी सिस्टम सोया हुआ है।

लखनऊ के अलीगंज में कोचिंग में आग से 15 छात्रों की मौत के बाद भी उझानी ने कोई सबक नहीं लिया। यहां हालात लखनऊ से भी बदतर हैं।

नगर का पंजाबी कॉलोनी और मिल कंपाउंड उझानी के कोचिंग हब बन चुके हैं। नगर का भल्ला मैंमियां मोबाइल मार्केट समेत दर्जनों इलाकों में सैकड़ों दुकानें तंग गलियों में चल रही हैं। रोज हजारों लोग , छात्र-छात्राएं यहां आते हैं। आग लगी तो दमकल की गाड़ी गली के मुहाने पर ही खड़ी रह जाएगी।

ज्यादातर कोचिंग दूसरी मंजिला इमारतों पर चल रही हैं। सीढ़ियां महज 2.5 फीट चौड़ी। बेसमेंट में भी क्लास चल रही हैं। ऊपर से थर्माकोल की फॉल्स सीलिंग, खुले तार और फाइबर पार्टिशन – चिंगारी मिलते ही सब राख। हादसे में बाहर निकलने का कोई दूसरा रास्ता नहीं।

यूपी भवन निर्माण उपविधि कहती है , व्यावसायिक भवन के लिए सड़क 12 मीटर चौड़ी हो, एंट्री-एग्जिट अलग हों, चारों तरफ दमकल घूमने की जगह हो। उझानी में एक भी कोचिंग इस लायक नहीं। फायर विभाग की मिलीभगत से संकरी गलियों में नर्सिंग होम, होटल तक चल रहे हैं।

पूरे जनपद में सिर्फ 8 कोचिंग पंजीकृत हैं। उझानी में ही 40+ सेंटर बिना रजिस्ट्रेशन धड़ल्ले से चल रहे हैं। एक बैच में 50-50 बच्चे ठूंसकर पढ़ाए जा रहे हैं। फायर एनओसी किसी के पास नहीं। बताते हैं कि सीएफओ नोटिस भेजकर खानापूर्ति कर रहे हैं, लाइसेंस रद्द करने की हिम्मत कोई नहीं दिखा रहा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि चेकिंग सिर्फ हादसे के बाद होती है। अगर लखनऊ जैसी घटना उझानी में हुई तो जिम्मेदार कौन? अभिभावकों की मांग है – सभी कोचिंग की तुरंत फायर ऑडिट हो, मानक पूरे न करने वालों पर ताला लगे और संचालकों पर एफआईआर हो।

— राजेश वार्ष्णेय एमके।

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