राष्ट्रीय मानव सेवा संस्थान ट्रस्ट रजिस्टर्ड भारत ने गांधी जयंती एवं प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती मनाई राष्ट्रीय मानव सेवा संस्थान की राष्ट्रीय अध्यक्ष बिंदु इशिका सिंघानिया ने बापू महात्मा गांधी और पूर्व प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती पर उनकी प्रतिमाओं को पुष्पमाला पहनकर नमन किया और बताया लाल बहादुर शास्त्री जी 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के ‘मुगलसराय’ जिसे अबहम ‘पंडित दीन दयाल उपाध्याय नगर’ के नाम से जानते है बहादुर शास्त्री जी के साधारण, सहज, ईमानदार व्यक्तित्वऔर जीवन के विषय में हम सब ने प्रचुरता से पढ़ा और जाना है आज हम एक प्रधान मंत्री के रूप में उनकी राजनीतिक और प्रशासनिक क्षमता के कुछ पहलुओं पर दृष्टिपात करेंगे देश के स्वतन्त्रता आंदोलन में अपनी महती भूमिका के बाद शास्त्री जी की राजनीतिक यात्रा गृह प्रदेश उत्तर प्रदेश सेआरम्भ हुई | संसदीय सचिव से लेकर मंत्रालयों तक का दायित्व निभाने के बाद 1951 में उन्हें ‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस’ का महासचिव नियुक्त किया गया शास्त्री जी की योग्यता और लोकप्रियता को देखते हुए 13 मई 1952 को उन्हें केबिनेट मिनिस्टर रेल मंत्रालय का दायित्व सौंप कर राज्य से केंद्र की राजनीति में प्रवेश दिला दिया और मोहन दास करमचंद गांधी पोरबंदर गुजरात में जन्मे और बापू जी के नाम से प्रसिद्ध है मैं इन दोनों महापुरुषों की जयंती पर इनको नमन करती हूं राष्ट्रीय महामंत्री नरेंद्र पाल ने 2 अक्टूबर गांधी जी एवं लाल बहादुर शास्त्री जी को पुष्पांजलि देकर नमन किया और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के विषय में प्रकाश डालते हुए कहा की 1959 में वे देश के गृह मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद पर आसीन हुए उनकी राजनीतिक यात्रा 9 जून 1964 को अपने शिखर पर पहुँचती है जब 27 मई 1964 को जवाहर लाल नेहरू के निधन के पश्चात उन्हें प्रधान मंत्री पद की शपथ दिलाई जाती है असमय निधन के कारण वे बहुत कम समय अर्थात लगभग डेढ़ वर्ष तक ही प्रधान मंत्री के पद पर अपनी सेवाएं दे सके थे| किन्तु इतने अल्प समय में ही अपनी राजनीतिक दक्षता के बल पर उन्होंने देश को उन्नति के एक नए पायदान पर लाकर खड़ा किया वे हरित और श्वेत क्रान्ति के संवाहक बने | देश में खाद्यान की कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने न केवल हरित क्रान्ति की नीव रखी बल्कि कृषकों के परिश्रम को सम्मान देते हुए “जय किसान” का नारा भी दिया | दूध के उत्पादन को बढ़ाने और देश भर में उसके वितरण को समुचित करने के लिए ‘AMUL’ की कार्य प्रणाली को बेहतर करने के लिए “राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड’ की स्थापना की दरअसल पकिस्तान कश्मीर के क्षेत्र में लगातार अपनी बढ़त बनाता जा रहा था | उसे काउंटर करने के लिए शास्त्री जी ने एक बड़ा ही साहसिक और कड़ा निर्णय लिया | उन्होंने सेना को अनुमति दी की वो बिना किसी हिचकिचाहट के अंतर्राष्ट्रीय सीमा पार कर सीधे लाहौर को अपने कब्ज़े में ले | हमारी बहादुर सेना ने जब लाहौर और उसके आस पास के क्षेत्रों पर अपना कब्ज़ा कर तिरंगा फहराना शुरू किया तो पाकिस्तान तुरंत घुटनों पर आ गया | भारत के इस आक्रामक रुख का परिणाम हुआ ‘ताशकंद समझौता’| रूसी राजनेता अलेक्सी कोसिगिन के प्रतिनिधित्व में 10 जनवरी 1966 को रूस/उज्बेकिस्तान के शहर ताशकंद में हुए इस समझौते के तहत मुख्यता युद्ध पूर्व की स्थित की बहाली की बात कही गयी | ‘जय जवान’ का नारा भी शास्त्री जी द्वारा उन्हीं दिनों दिया गया था देश का दुर्भाग्य रहा कि इस समझौते के अगले ही दिन यानी की 11 जनवरी 1966 को अचानक ताशकंद से ही शास्त्री जी की मृत्यु की खबर आती है | पूरा देश स्तब्ध रह जाता है | किन्तु नियति को शायद यही मंज़ूर था देश को दिए गए अपने महत्वपूर्ण योगदानो के लिए भारत सरकार नें शास्त्री जी को “भारत रत्न” से सम्मानित किया अपनी ईमानदारी, कर्तव्य निष्ठा और देश के प्रति समर्पण के लिए भारत के लाल, शास्त्री जी को सदैव भारतवासी याद करते रहेंगें

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